Friday, November 27, 2009

फ़ोन नम्बर जब ट्यूमर बन जाए...

दोस्तों इस नज़्म के बारे में कुछ नही कहूँगा। ये क्या कहना चाहती है ख़ुद समझिये। न समझ ए तो मुझसे पूछियेगा अपने ई- mail एड्रेस या फ़ोन नम्बर के साथ।

वो एक फ़ोन नम्बर मेरे ज़हन में दुबका है कहीं।
डिलीट कर दिया है कबका अपने सेलफोन से।
ज़रा खदेड़ो लाठी डंडों से इसको,
वरना ट्यूमर सा फट पड़ेगा कभी।
ये मुझे अक्सर ही दर्द देता है रह रहकर।
जब कभी माज़ी की नब्जों में ये फस जाता है।

1 comment:

zindagi yuhi chalte rahe said...

kuch cheezen kabhi bhulaye nahi jate, aur kabhi kabhi enhe aise hi rehne dena chahiye warna ye aur bhi dard dete hai..